Prasar Bharati

“India’s Public Service Broadcaster”

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Wednesday, September 28, 2016

Inspiration-Bengaluru-based ElderAid is helping senior citizens ‘Live Life Fully'




I am 70 years old, single, and living alone in Bengaluru’s Indiranagar area. I was recently diagnosed with Parkinson’s, which left me insecure and continually worrying about my well-being. After all, who will take me to the hospital if there’s an emergency, who will keep a check on me continually?
Niranjan Acharya story isn’t an isolated one. According to the latest official figures released by the Ministry of Statistics, India has recorded an all-time high population of citizens over 60 years of age; accounting for 8.6 per cent of the country’s 121-crore population. Ageing is slowly emerging as a new social challenge. As a nation, we need to figure how to respond to the new needs, and this is naturally going to take some time. Thankfully, social enterprises such as Bengaluru-based ElderAid has already stepped up to lead the game.
Founded in 2015, co-founders Santosh Abraham and Dr. Vandana Nadig Nair were neighbours and over many conversations, the idea of serving senior citizens in India in a way that they ‘LIVE LIFE FULLY’ emerged. While Santosh has nearly three decades of diverse experience across sales, marketing, business development and entrepreneurship, Vandana is an Organizational Psychologist who holds a Masters from the Michigan University. Once they decided to collaborate and venture in to the senior citizens space, the duo conducted intensive market research of over eight months. Santosh explains their finding saying,There are innumerable healthcare companies. But there aren’t many care organisations that can holistically help senior citizens address their healthcare, wellness, and lifestyle needs.
ElderAid believes that ‘age is just a number…senior citizens have vibrant lives, aspirations, and hobbies.’ All they need is a little support, and that’s where ElderAid decided to step in. According to Santosh “We are a single point of contact, like a concierge service, or a proxy child. There isn’t any service/problem we don’t respond too. Even if it isn’t a part of our package, we make it happen.”.........
Source, Credit and read more at:https://yourstory.com/2016/05/elderaid/

Tuesday, September 27, 2016

सपने देखना सिखाने वाले फादर गिल्सन - a beautiful memoir from Sh. Jawhar Sircar


प्रेरणा... पढ़ानेके हुनर और विशेष देखभाल से नाकाम बच्चे को भी टॉपर में बदला जा सकता है......


मुझे आजभी याद है कि जब दसवीं कक्षा के 'ह्यूमेनिटीज' सेक्शन में नई क्लास में शामिल हुआ तो कितना घबराया हुआ था। नौवीं कक्षा पास करने के बाद मुझे 'साइंस' पढ़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके पहले मैं 8वीं कक्षा में फेल हो चुका था और उन दिनों मुझे सारे लोग स्कूल के 'खराब लड़कों' में शूमार करते थे। ऐसा लड़का जो हमेशा किसी किसी से लड़ता रहता है और पढ़ाई में जिसकी बिल्कुल रुचि नहीं है। एेसे में नए विषय के साथ नई कक्षा।

मेरी इस नई क्लास में सबकुछ बड़ा अजीब-सा था: कक्षा का कमरा, वहां के बच्चे और यहां तक की पढ़ाए जाने वाले विषय भी मेरे लिए तो अनजाने ही थे। वहां फिजिक्स, केमेस्ट्री या मैथ्स की पढ़ाई नहीं होती थी, केवल हिस्ट्री, ज्यॉग्रफी अौर लिटरेटर जैसे मूर्खतापूर्ण (तब मुझे ऐसा ही लगता था) विषय पढ़ाए जाते थे। लेकिन इन सबसे अजीब तो मेरे शिक्षक थे, फादर पी.वाई. गिल्सन। उन्हें तब तक मैंने सिर्फ गलियारों में इधर-उधर गुजरते ही देखा था। मैं जब भी उन्हें देखता तो यह सोचकर हैरान होता कि यह इतना शांत, सौम्य बेल्जियन मिशनरी, जिसका एक खास तरह का फ्रांसीसी लहजा है, अपने लंबे सफेद पादरियों वाले कैसक गाउन में भारत की भीषण गर्मी से बच कैसे गया। पहले ही दिन फादर गिल्सन ने मुझे आगे आकर पहली बेंच पर बैठने को कहा। अब तो हद ही हो गई थी, क्योंकि सबसे आगे की बेंच तो 'अच्छे बच्चों' के लिए होती थी। मैं उस तरह का बच्चा तो कतई नहीं माना जाता था। मुझे आगे बुलाकर वे सीधे अपने लेसन पर गए। अपनी खास शैली से पढ़ाने लगे। उन्हें जरा भी ख्याल नहीं था कि मुझे शायद ही कुछ समझ में रहा था। मैंने ह्यूमेनिटीज के इन विषयों के बेसिक्स की कक्षा नौवीं में पढ़ाई नहीं की थी। फिर मुझे इतिहास पसंद भी नहीं था, जो मेरे ख्याल से बहुत उबाऊ विषय था। लेकिन बड़ी अजीब बात थी कि फादर विल्सन यह विषय इस तरह नहीं पढ़ाते थे, जैसे वह कोई राजाओं के कामकाज और युद्धों की तारीखों की लंबी, रसहीन, शुष्क सूची हो। मैं अनचाहे ही वे जो पढ़ा रहे थे, उसकी ओर आकर्षित हो गया, क्योंकि वे इतनी रोचक कहानियों का वर्णन क्या, चित्रण ही कर रहे थे।

उनका वर्णन इतना जीवंत था कि मैं तो मंत्र-मुग्ध होकर उन्हें सुनने लगा और जाने कब धीरे से किसी जादुई कालीन पर सवार होकर फैंटसी की दुनिया में पहुंच गया। जब कक्षा का समय खत्म हुआ तो मुझे खुद पर ही विश्वास नहीं हो रहा था कि मुझे वाकई इतिहास पढ़ने में मजा आया। फिर मैंने पाया कि फादर जब इंग्लिश लिटरेचर पढ़ाते तो उसमें भी मुझे बहुत आनंद आता, जबकि लिटरेचर से तो पहले मुझे नफरत थी। अभी तो आश्चर्य लोक के और भी दरवाजे खुलने थे। इस जादूगर की टोपी से और कहानियां निकलीं और जल्दी ही ऐसी हालत हो गई कि मैं उनकी कक्षाओं का बेसब्री से इंतजार करने लगा। फादर गिल्सन ने मेरा सबसे बड़ा रूपांतरण शायद यह किया कि उन्होंने मुझमें सिर्फ उनके विषयों के प्रति मेरे भीतर उत्सुकता, रुचि जगा दी बल्कि पढ़ाई के प्रति मुझे जिज्ञासु बना दिया। क्लास टीचर के रूप में वे अध्ययन संबंधी मेरे सारे मामलों के प्रभारी थे। कक्षा के दौरान और बाद में वे आमतौर पर मुझे एक्स्ट्रा लेसन हेतु उनसे मिलने के लिए प्रोत्साहित करते ताकि पूरे साल की पढ़ाई में जो छूट गया था, मैं उसकी भरपाई कर सकूं। वे जो मेरा खास ध्यान रख रहे थे उसका दुनिया के प्रति मेरे नज़रिये में सुकूनदायक असर पड़ा।

लेकिन मेरी सपनों की यह दुनिया पहले क्लास टेस्ट की कठोर वास्तविकता से बिखर गई, क्योंकि मुझे पक्का अहसास था कि मैं तो कक्षा की अंतिम पंक्ति में खड़ा रहने के लिए ही अभिशप्त हूं। पहला ही टेस्ट 'इंग्लिश एसे' का था और मुझे तो हमेशा ही शब्दों का अकाल सताता था। किंतु जब टेस्ट का परिणाम घोषित हुआ तो मैं स्तब्ध रह गया। कोई हल्के से धक्का देता तो मैं नीचे गिर जाता, ऐसी दशा थी : मैं कक्षा में चौथे स्थान पर आया था! मेरे पैरेंट्स की खुशी का तो ठिकाना नहीं रहा। मेरे दोस्तों ने मुझे पिंच किया, लेकिन किसी को इस बात का अहसास नहीं था कि इस सफलता से मेरा आत्म-विश्वास कितना बढ़ गया था। अगला 'आश्चर्य' तब आया जब मैं एरिथमैटिक्स में 'प्रथम' आया, जो इतना कठिन नहीं था, क्योंकि मैं विज्ान की पढ़ाई करके आया था। मैंने सपने देखना सीख लिया था। फिर इतिहास, भूगोल और अन्य विषयों के नतीजे आए, लेकिन अब प्रथम आने का यह जो नया रोमांच था उसे मैं रोक नहीं सकता था। एक छोटी सफलता के बाद दूसरी सफलता, बेशक उसके पीछे बहुत कठिन परिश्रम और संतों जैसे शिक्षक का सतत मार्गदर्शन होता था। कुछ महीनों बाद हमें पता चला कि फादर गिल्सन अब किसी दूसरे स्कूल में पढ़ाने जाने वाले हैं और एक-दो दिन बाद वे चुपचाप चले भी गए। मैं खूब रोया, क्योंकि और कोई इस तरह मुझे पूरी तरह नहीं बदल सकता था। मैं आज जो भी हूं, जहां भी हूं, यह उनका ही करिश्मा है। उनका आभार किन शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है, मुझे नहीं पता।

एक दशक बाद मैं पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले के आसनसोल दुर्गापुर का अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त हुआ। वहां मुझे एक दोस्त से यह सुनकर बहुत खुशी हुई कि फादर गिल्सन दुर्गापुर में सेंट जेवियर स्कूल के हैडमास्टर हैं। मैं सीधे उनसे मिलने गया। मैंने जैसे ही फादर के कमरे में प्रवेश किया एक परिचित खुशबू ने मेरा स्वागत किया। उन्होंने बहुत गर्मजोशी से मुझसे हाथ मिलाए। उन्होंने मुझे कहा, 'मुझे तुम पर गर्व है।' वे बिल्कुल वैसे ही थे, हां कुछ बूढ़े जरूर हुए थे। मैं अब मजिस्ट्रेट था, जो पूरी दृढ़ता के साथ विशाल भीड़ के सामने खड़ा हो सकता था, लेकिन उनके सामने मैं पूरी तरह बदल गया। आत्म-विश्वास की प्रतिमूर्ति से अब मैं ऐसा थरथराता, घबराया हुआ 'स्टूडेंट' हो गया था, जिसे बोलने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे।

इसके पहले कि मैं अपनी कृतज्ञता को उचित शब्दों में व्यक्त कर सकू, घंटी बज गई और फादर गिल्सन अपनी कुर्सी से उछलकर खड़े हो गए और कुछ हैरानी के स्वर में कहने लगे, 'ओ माय गॉड, अभी तो एक और कक्षा में जाना है। वहां छोटे-छोटे बच्चे इंतजार कर रहे हैं। नटखट बच्चे, जैसे तुम थे। मुझे जाना चाहिए। गॉड ब्लेस यू, माय सन। और तरक्की करो। पर अब मुझे जाना ही होगा।' उनके पास उस आभार के शब्द सुनने का वक्त नहीं था, जो हमेशा बने रहने वाला है। वह मेरी उनसे अंतिम मुलाकात थी।

जवाहर  सरकार प्रसारभारती के सीईओ 
facebook.com/sircar.j.
sircar.j@gmail.com

Source and Credit :- http://epaper.bhaskar.com/detail/?id=785133&boxid=92614746500&view=text&editioncode=194&pagedate=09/26/2016&pageno=10&map=map&ch=cph
Forwarded by :- Shri. Jainendra Nigam PB News Desk prasarbharati.newsdesk@gmail.com and Shri. Sachin Bhagwat.      sachinbhagwat69@gmail.com

Radio Kashmir Jammu Senior Announcer Awarded by J&K State Academy











Senior Announcer ( Gojri) , Radio Kashmir Jammu Sh. Hassan Perwaz Received Best Play Script Award from CAPD Minister of J&K Chowdhary Zulfkar Ali sb.on 23.09.2016 at Rajouri .The award was conferd by J&K Academy of Art , Culture and Languages for best play script in 2014 for his Gojri stage play entitled " KAKHAAN GI KULLI " .The play depicts the nomadic life style , culture and miseries faced by this community. Hassan Perwaz is a very popular voice of Radio Kashmir Jammu and is also an excellent writer in Gojri.

Contributed by :- Shri. Nitish Arora  nitisharora@rediffmail.com

‘Nanmayude Nadavazhikal’ (Footsteps of Virtue) Book Published


Thiruvananthapuram: ‘Nanmayude Nadavazhikal – Keralam Jeevichathingane’ (Footsteps of Virtue – This was how Kerala lived), the book written by Muraleedharan Thazhakara, author and Programme Executive with All India Radio and published by Kerala Bala Sahithya Institute, was released during the Annual Meeting of A.G.P. Foundation at Thazhakara near Mavelikkara in Kerala. The release was done by Shri. Prayar Gopalakrishnan, the President of Travancore Devaswam Board, by handing over the first copy of the book to Dr. G C Gopala Pillai, former Chairman and Managing Director of FACT, Kochi.

Shri. G Sudhakaran, Minister for Public Works, Government of Kerala, Dr. Joshua Mar Ignatios Metropolitan, Shri. Chunakkara Janardhanan Nair, Editor of Sahithyaposhini monthly, Smt. Leela Abhilash, Municipal Chairperson and Shri. K Reghuprasad, President of Block Panchayat attended the function.

Contributed by :- Shri. Sandeep Suresh, Transmission Executive, AIR Thiruvananthapuram
air.sandeep@hotmail.com

पहाड़ी नाटी और गीतों से कलाकारों ने बांधा समा

शिमला में आकाशवाणी आकस्मिक उदघोषक एंव प्रस्तोता कर्मचारी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को देखते लोग।
आकाशवाणी कैजुअल उद्‌घोषक एवं कंपीयर वर्कर्स संघ की ओर से रविवार को गेयटी थियेटर में पहला स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम में एडीएम लॉ एंड आर्डर ज्ञान नेगी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की, विशेष अतिथि के तौर पर यहां समाजसेवी राम नाथ मेहता ने शिरकत की। कार्यक्रम में आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्‌घोषक रहे अच्छर सिंह परमार और कलाकार जय सिंह भी उपस्थित रहे।

इस मौके पर ऋचा ने गणेश वंदना के साथ मनमोहक प्रस्तुती से कार्यक्रम का आगाज किया। इस मौके पर हिमाचली लोक संस्कृति, देशभक्ति गीत, पहाड़ी गीत, पहाड़ी नाटी, करयाला आदि विभिन्न प्रस्तुतियां आकाशवाणी कैजुअल कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। इसमें जगदीश और लेखराम द्वारा पहांड़ी गीत हाय हाय जवाना, रीता द्वारा ‘उच्चियां जे रीढिय़ा’, सीमा और जगदीश द्वारा ‘कुंजु चंचलों’, चंपा और सीमा आरजू द्वारा गजल, वंदना द्वारा कविता, बसंत ठाकुर द्वारा बिलासपुरी गीत, हर्षा शर्मा द्वारा शास्त्रीय नृत्य ने सबका मन मोह लिया।

वहीं किन्नौरी नाटी, हिमाचली गिद्दा , प्रोमिला द्वारा लोक गीत, पोर्टमोर स्कूल की छात्रों द्वारा पहाड़ी नाटी प्रस्तुत की गई और जय प्रकाश शर्मा द्वारा हास्यनाटक बुआ ने सबको खूब हंसाया। इस मौके मुख्यातिथि ने कहा कि आकाशवाणी कैजुअल उद्घोषक एवं कंपीयर वर्कर्ज यूनियन द्वारा हिमाचल की संस्कृति को एक मंच पर लाने और नई पहचान देने की सराहना की। इस मौके पर संस्था की अध्यक्षा तृप्ता मेहता ने कहा कि आज के दिन रानी झांसी पार्क में आकाशवाणी कैजुअल उद्घोषक एवं कंपीयर वर्कर्ज यूनियन की नींव रखी गई थी। 

Source and credit:- http://www.bhaskar.com/news/HIM-SHI-OMC-MAT-latest-shimla-news-021001-1049266-NOR.html
Forwarded By:- Shri. Jainender Nigam, PB NewsDesk prasarbharati.newsdeskgmail.com

BES Thanjavur orgainsing Seminar on Cyber law and safety in Social Media on 27th September


Broadcast Engineering Society Thanjavur chapter has organized seminar on Cyber law and safety in Social Media on 27th September at 2:30 P.M. Venue is Seminar Hall. Dr. P.Selvaraj, Chairman, Shivani Group of Institutions will deliver Presidential address. Key note address will be given by Mrs. A.Chitra, Chair person BES(I) Thanjavur chapter and Deputy Director (Engg.) Doordarshan, Tiruchirappalli. Mr. V.Appakutty, Ex.Chief Engineer, AIR & DD, South Zone, Chennai is invited as guest lecturer.

Contributed by : A. Chitra, DD(Engg.) DDK Tiruchirappalli,chitramuthu10@gmail.com

Workshop on " Staff Welfare Measures" Inaugurated today at AIR, Puducherry conducted by RABM(P), Thiruvananthapuram
















A three day Workshop on “STAFF WELFARE MEASURES” conducted by Regional Academy of Broadcasting & Multimedia(P), Thiruvananthapuram was inaugurated today morning 26.09.2016(Monday) at All India Radio, Puducherry.Shri.S.Radhakrishnan, ADP, RABM(P), Thiruvananthapuram, Smt. Lekha Gopal, PEX, RABM(P), Thiruvananthapuram, Shri.Prabhakaran, ADP, AIR, Puducherry, were present in the inauguration session. Medical Facilities (CGHS), Welfare Measures for staff, Ayurvedic, Siddha, Unani, Homeopathiuc Tratments , Treatment for Special Diseases, Incentives-for promoting small family norms, Incentives for acquiring higher qualification, AMA Facilities, Compensation to the family of an employee who dies in Harness , Group Insurance , interaction sessions and practical exercises based on these topics etc: will be dealt with in detail during the three days.

Shri.K.P.Sasidharan, Consultant, ADG’s Office, DDK, Bangalore is the Course Coordinator. Subject experts such as Shri.M.S.Rajaram, Former Sr.Audit Officer O/O Principal Account General, Chennai and Shri.R.Joseph Suresh, Former AO, Vector Control Research Centre, Indian Council of Medical Research, Puducherry will handle the various sessions. 18 participants from various All India Radio & Doordarshan Kendras are participating in the workshop.

Contributed by :- Shri.Radhakrishnan.S, Assistant Director(P), RABM(P), Thiruvananthapuram
rabmptvm@gmail.com

Monday, September 26, 2016

दुखद निधन.

आकाशवाणी पुणे में सुरक्षा प्रहरी पद पर कार्यरत श्री. वसंत बाबूराव बनके जी का दिल का दौरा पड़ने से शुक्रवार दि. 23 सितंबर 2016 के दिन दुखद निधन हुआ। उनकी उम्र  56 साल थी। वह उन्नीस साल भारतीय फ़ौ ज (बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप ) में सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हो गए। उसके बाद पी. डब्लू डी में बत्तौर सुरक्षा रक्षक जिम्मेदारी निभाई। वह पिछले दो साल से महाराष्ट्र माजी सैनिक महामंडल की ओर से आकाशवाणी पुणे में  सुरक्षा प्रहरी पद पर नियुक्त किये गए थे। वह अपने काम के प्रती ईमानदार थे साथ ही सबके साथ उनका अच्छा बर्ताव था।

आकाशवाणी पुणे तथा प्रसार भारती परिवार उन्हें भवभीन श्रद्धांजलि अर्पित करता है और परमात्मा से प्रार्थना करता है की उनकी आत्मा को शांति मिले।  आकाशवाणी पुणे तथा प्रसार भारती परिवार संकट के समय उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हैं।  

Press Coverage....AVSS 2016, AIR Bhopal






 
 




Source - Rajeev Shrivastav AIR Bhopal
Blog Report - Praveen NAgdive AIR MUMBAI

रिक्शा पर AIR(102.60) की शानदार रेडियो डाक्यूमेंट्री

 
 
Rickshaw's Journey - Akashvani Feature produced by Basudha Banerji, Programme Executive, AIR, Delhi, Script - Sarita Brara,  which was broadcast in National Programme of Features (English) on Akashvani's FM rainbow network and Rajdhani channel has received very good media praise. TV Journalist Ravish Kumar has lauded the programme in his blog post......

 
कई बार रेडियो रात का लौटना सुखद बना देता है। सायमा की पुरानी जीन्स ढूँढते ढूँढते एक ऐसे स्टेशन पर ठहर गया जहाँ रिक्शा पर डाक्यू चल रही थी। जसलीन वोहरा की नफ़ीस और ठहरी हुई अंग्रेज़ी में रिक्शे की कहानी चली जा रही थी।चलती हुई कार में रिक्शा चलने लगता है।ऑल इंडिया रेडियो की यह डाक्यूमेंट्री इतनी अच्छी है कि इसे हर किसी को सुननी चाहिए। भरोसा दिलाती है कि जन माध्यम में क्वालिटी कार्यक्रम बन सकते हैं। मीडिया के प्राध्यापक विनीत कुमार को बताया तो कहा कि पब्लिक ब्राडकास्टिंग की भूमिका पूरी बहस से ही ग़ायब है जबकि वहाँ कितनी संभावना है।

रिक्शा जापानी शब्द से आया है।हाथ रिक्शा जापान में ही आया। जाधवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की वृद्ध आवाज़ में रिक्शे की दास्तान ने रोमांचित कर दिया। कोलकाता में हाथ रिक्शा चीन से आए दस्तकार ले आए। कोलकाता से निकलकर कहानी शिमला आती है। शिमला के इतिहासकार भसीन साहब बताते हैं कि छोटा शिमला में एक पार्टी के दौरान एक अंग्रेज़ एक हाथ रिक्शेवाले को इतनी मारता है कि वो मर जाता है। सभी रिक्शेवाले मिलकर रायबहादुर मोहनलाल के पास जाते हैं। ब्रितानी पुलिस केस दर्ज नहीं करती है। रायबहादुर के दबाव में मुक़दमा चलता है और ब्रिटिश सेना के कैंटीन प्रमुख को जेल होती है।जहाँ वो ख़ुदकुशी कर लेता है। इतिहास को किस्से में बदलने का अच्छा फन दिखाया स्क्रिप्ट राइटर सरिता बरारा ने।प्रोड्यूसर कोई चटर्जी या बनर्जी थीं। उनका नाम नहीं नोट कर पाया। पता चलते ही सुधार कर दूँगा। उसके बाद कहानी दिल्ली आती है। मधु किश्वर का इंटरव्यू चलता है। उनकी संस्था मानुषी ने रिक्शेवाले पर काम किया है। मधु किश्वर बताती हैं कि ई रिक्शा पर्यावरण का मित्र नहीं है बल्कि इसमें इस्तमाल होने वाली बैटरी पर्यावरण को नुक़सान पहुँचा रही है। सेंट स्टीफेन्स अस्पताल के आमोद कुमार से बात होती है।रेडियो डाक्यू जानकारी से भरपूर है। एक कमी रह गई। इस मसले पर काम करने वाले राजेंद्र रवि की आवाज़ नहीं सुनाई दी। जबकि रिक्शा पर उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। स्क्रिप्ट की एक कमी थी। सिर्फ एक। Drudgery का कई बार इस्तमाल हुआ है।बस यही खटका।जसलीन की आवाज़ अच्छी है। अंदाज़ भी। कोई नाटकीयता नहीं।

102.60 के साथ रिक्शा की यह कहानी याद रहेगी। इस डाक्यूमेंट्री ने मुझे बाँध लिया। मैं पार्किंग में पहुँच कर भी ख़त्म होने तक कार में बैठा सुनता रहा। ख़ास बात यह रही कि डाक्यू के बीच बीच में गाना नहीं चला। गाना चला लेकिन बैकग्राउंड में सिर्फ अहसास के लिए बजा। दो बीघा ज़मीन के संवाद,स्टेशन, संगीत और घंटी की ध्वनि का बेहद ख़ूबसूरती से इस्तमाल हुआ। इसकी एडिटिंग शानदार है। आमी जे रिस्कावाला…बिनती एमॉन जाबे…इस गाने को सुनते सुनते लगा कि कार से नहीं रिक्शे से लौट रहा हूँ । घर आकर भी यही गाना सुन रहा हूँ। आमी जे रिस्का कोबी…रिक्शा नहीं रिस्कावाला। गायक ने रिस्का ही गाया है।ऑल इंडिया रेडियो को बधाई।
श्री. रवीश कुमार

Source and Credit :- http://naisadak.org/excellent-radio-docu-on-rickshaw/
Forwarded by :- Shri. Jainendra Nigam PB News Desk prasarbharati.newsdesk@gmail.com

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